शिक्षा

शब्दों की भूमिका = शब्दों की भूमिका, बड़ी ही निराली हैl

शब्दों की भूमिका

शब्दों की भूमिका
बड़ी ही निराली हैl
कभी चुभन है तो,
कभी कभी ताली है l
कभी फूल से हैं शब्द,
कभी शूल से हैँ शब्द l
चाकू तलवार और पिनें,
सबको बैठा दें कोने में l
शब्द करें सबको स्पर्श,
पर शब्द नहीं हों स्पर्श l
कानों को करते हैँ स्पर्श,
और हृदय भी करें स्पर्शl
शब्दों से ही होता है प्रेम,
शब्दों से ही हो नफरत l
शब्दों से होता सम्मान,
शब्दों से होता अपमानl
सूखी रोटी भी स्वाद की,
शब्दों की मिश्री हो भरी l
शब्दों से कौन है जो लड़े,
शब्दों से कौन क्या कहेंl
शब्द से हैं दिखता चरित्र,
शब्द से ही बनता है मित्र l
शब्द सबको लड़ाया करें,
शब्द सबको मिलाया करें l
छूना चाहे इन्हें सभी पर,
कभी छूना ना सकें शब्दl
शब्द के होते हैँ कई रूप,
कभी शांत तो कभी चूप l
शब्द न करें कभी शिकायत,
शब्द रहते हमेशा बेफिक्र l
लाभ और हानि आप जानें ,
जैसा हम बोयें वैसा ही काटें।
शब्द से कबीरदास बना,
शब्द से ही सूरदास बना ।
वरना एक नाम के ही,
न जाने कितने लोग हैं l
शब्दों का प्रयोग सही हो,
तब कहीं शब्द सार्थक हों l
शब्द की सब महिमा है,
सुंदर हो शब्द माला ये l
शब्दों की भूमिका,
बड़ी ही निराली है l

पूनम पाठक
इस्लामनगर बदायूं
उत्तर प्रदेश

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पवन कमल

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